Wednesday, July 30, 2014

kahi dab ke rah gayi hai meri kavita ,
har pal likhi jane vali kavitaon ke neeche.....
kahi rubrun ho usse to mujhe bhi milva dena meri kavita se....

Friday, January 10, 2014

'सपनो का सखा'.....

कृषिनिका  कि हंसी ही नहीं रुक रही थी ....... वो हंसती जा रही थी और बोले जा रही थीं कि वह  पागल हो गया है ,मुझे सखी कह कर बुला रहा  है........ तो मैं भी पीछे नहीं हटी और मैंने भी उसे सखा कह दिया। ………  आज कई साल हो गए इस बात को ,लेकिन उसका ये सखा उसके हर सुख दुःख में उसके साथ ही रहा.……कभी उसके विचारो में और कभी उसकी रचनाओं में। 
    एक वक्त था जब उसे हर छोटी -बड़ी बात को लेकर अपने पति की  बात सुननी  पड़ती थी और उसमे हिम्मत भी नहीं थी कि वह उनसे आँख मिलकर बात करले ,इसलिए नहीं कि वह गलत होती थी ,बल्कि इसलिए कि उसे पता था यदि उसने बोला तो डांट ही पड़ेगी। ……ये डर कृषिनिका को कुछ भी बोलने से रोक देता था……
  उस दिन जब उसने ये बात अपने सखा  को बताई तो उसने कहा डरके जीने से काम नहीं चलेगा...... बस एक बार अपने पति कि आँखों में आँखे डाल  कर बात करो बस उन्हें ये एहसास हो जाये कि तुममे भी हिम्मत है तो दुबारा ऐसा नहीं होगा। ……… और ऐसा ही हुआ। ....उसके बाद  कृषिनिका ने बहुत कोशिश कि वो अपने उस सखा से कभी मिल पाये पर  हो न सका क्योकि 'सपनो  का सखा' सामने आता भी तो कैसे ……… 

Wednesday, January 8, 2014

हाँ बटवारा ही तो होना था .... लेकिन  इतनी जल्दी क्यों थी सभी को। …हो  सकता है उन्हें संपत्ति कि जरुरत रही होगी       नहीं तो इस तरह से तो बात नहीं करते वे लोग। …… 
हर बार बटवारा हमलोगो कि वजह से ही रह जाता था ,क्योंकि जब भी बटवारे कि बात होनी होती थी तो हमलोग ही नहीं पहुच पाते थे। ....... लेकिन इस बार कुछ ऐसा हुआ कि  लगातार दो बार घर जाना पड़ा। ।कारण ही ऐसा था कि हर हालत में जाना ही था। एक  नहीं दो लगातार  मृत्यु हो गयी थी एक बाद एक। ।घर में सभी परेशान थे कि अचानक हमारे घर में हो क्या रहा है। …फिर अपने मन को समझाया कि जन्म और मृत्यु हमारे हाथ में नहीं है। …ये सब ईश्वर  कि इक्छा  है। ……
                 सारे पूजा -पाठ होने के बाद हमलोग ,सभी घर के सदस्य एक साथ बैठे ही थे कि किसी ने कहा , भई आप लोग ख़ुशी में तो आते नहीं है तो बेहतर है कि बटवारे कि बात भी हम लोग अभी ही कर लेते है। ……हमलोग निरुत्तर से उनकी हाँ में हाँ मिलाने को मजबूर थे। ……… क्योकि गलत तो वे लोग भी नहीं थे। ..........