sansmarad......
Monday, July 27, 2015
Monday, March 16, 2015
तुमने तो कहा था कि तुम बहती नदी हो ,
फिर आज बहते रहने में इतना दर्द क्यों है।
जिस दिन तुम रुक गए तालाब बन जाओगे ,
तेरी उस कुंठा को मै कैसे सह पाऊँगी।
बहती नदी को तो हर पल बहते रहना है।
फिर आज उसकी धारायें क्यों रुक जाने को बेताब हैं।
Wednesday, January 28, 2015
हमने नहीं चाहा कि चाँद तारे तोड़ लाये कोई ,
न ही चाहत है कि देवी बनाकर पूजे कोई ,
हमने तो साथ चलने की इजाजत मांगी है ।
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