Friday, December 27, 2013

उस दिन अभिनव ने सोचा , जब मेरा ATM कार्ड दुबारा से बन जायेगा तो मैं उसकी मदद जरुर करूँगा ,उसे कुछ पैसे देकर।  वो जो  बहुत गरीब था ,बूढ़ा और ठीक से चलने में भी सक्षम नहीं था  । फिर भी अपनी जीविका के लिए रेलवे स्टेशन पर छोटे -मोटे सामान बेच कर अपना खर्च चल रहा होगा।  अभिनव उसे लोकल से आते -जाते रोज़ ही देखता था , लेकिन जिस दिन उसने उसकी सहायता करने कि सोची उसी दिन उसका एटीएम कार्ड कही गिर गया था। खैर कुछ दिनों बाद जब एटीएम कार्ड नया बन कर आया अभिनव काफी खुश था कि आज वो उसकी मदद कर पायेगा। रोज़ कि तरह आज भी वह  इंसान अभिनव को वहीं मिला अपने समानों को बेचते हुए। अभिनव उसके पास गया कि उसे कुछ पैसे देने के लिए। लेकिन वहा पहुँच कर वो हिम्मत ही नहीं कर पाया उसे पैसे देने की। उसे लगने लगा जैसे वो उसकी खुद्दारी को चुनौती दे रहा है। इसके बदले उसने उससे कुछ चीजे ही खरीद ली ,जो अभिनव के मतलब की थी भी नहीं -------क्योकि  वह उसकी मदद करना चाहता था बिना उसको उसकी नज़रो में गिराए। .......... और अभिनव इस बात से खुश भी था कि कम से कम वो अपना मेहनत  करके खा रहा है.......  

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